"टेलीविज़न"
1 comment:
दिगम्बर नासवा
December 13, 2010 at 12:25 AM
वाह वाह .. बहुत ही कमाल की कविता है मानस जी ... अच्छा हास्य और व्यंग है ...
Reply
Delete
Replies
Reply
Add comment
Load more...
‹
›
Home
View web version
वाह वाह .. बहुत ही कमाल की कविता है मानस जी ... अच्छा हास्य और व्यंग है ...
ReplyDelete